मनुष्य की जीवन यात्रा का सर्वश्रेष्ठ पड़ाव
वर्तमान में व्यक्ति अपनी सभ्यता परिवर्तन के जिस पड़ाव पर है, उस अवस्था में हम व्यक्ति को उसके अपने विकास या पतन, किस रूप में देखते हैं को समझना महत्वपूर्ण होगा | आज समाज में लगभग प्रत्येक व्यक्ति हर वो भौतिक सम्पदा प्राप्त करना चाहता है जो उसके पास नहीं है और है तो उसे और अधिक पाने का प्रयास करता है, यह व्यक्ति का स्वाभाविक गुंण तथा उसकी सर्जनशीलता का जीवंत रूप है | परन्तु महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति भौतिक सम्पदा को किस कीमत पर प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है | आज समाज के प्रत्येक पहलु जैसे सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक तथा पत्रकारिता इत्यादि के अंतर्गत अधिकतर व्यक्ति के गतशील होने का मूल लक्ष्य अपनी इच्छाओं को पूरा करना है, यहाँ तक तो हम व्यक्ति के स्वाभाविक गुण को ही देखते हैं परन्तु व्यक्ति जब अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए किसी दुसरे व्यक्ति या अनगिनत व्यक्तिओं की इच्छओं के विरुद्ध और कभी - कभी तो उनको समाप्त करने से भी नहीं चुकता, को देखतें हैं तो हम व्यक्ति के इस रूप को क्या कहेंगे ? विकासशील...