क्या हमारे देश की राजनीति पतनोमुखी हो चुकी है
क्या हमारे देश की राजनीति पतनोमुखी हो चुकी है अगर हम एक आदर्श समाज की नींव बनाने पर मंथन करें तो जो अतिविशिष्ट ईट नींव में डलेगी वह राजनीती रूपी ईट होगी | इस बात को हम अच्छी तरह से समझ सकते हैं कि अगर हमारे समाज की नींव मजबूत होगी तो यह भी सिद्ध है की हमारे जीवन मूल्य भी मजबूत और अपरिवर्तनशील होंगे | यह अटल सत्य है कि हम व्यक्तिगत जीवन जीते हुए एक आदर्श समाज के चहुंमुखी निर्माण में हम अपना योगदान तो दे सकते हैं परन्तु सक्रिय रूप से अपने को समर्पित नहीं कर सकते | अतः हम ऐसे व्यक्ति जिन्हे हम राजनेता कहते हैं को चुनते है, जो एक आदर्श समाज के निर्माण को समर्पित हो, मानवीय और प्राकर्तिक सम्पदा का उपयोग कर एक समृद्ध सामाजिक, आर्थिक,राजनैतिक, धार्मिक और वैदेशिक इत्यादि वातावरण बनाता है | इस बात को हम आसानी से समझ सकते हैं कि एक समृद्ध समाज में ही मनुष्य का उर्ध्वगामी विकास हो सकता है, जो नित्य होगा अन्यथा मनुष्य के विकास की पराकाष्टा एक ऐसी इमारत के समान होगी जिसकी नींव कमजोर रेत के धरातल पर बनी हो जो अवश्य ही ए...