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सामाजिक परिवेश में वैराग्य की उपयोगिता

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सामाजिक परिवेश में वैराग्य की उपयोगिता  भारतीय दर्शन में समाहित वैराग्य के सन्देश को मूल रूप में अपने जीवन व्यव्हार में उतारकर हम अपने को ऐसे सोपान पर पांएगे जहाँ पर हमारा आदर्शतम व्यक्तित्व होगा |   वर्तमान में वैराग्य के संदर्व में व्याप्त आम धारणा यह है कि अपने घर -परिवार तथा समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व को  छोड़ कर किसी अनजान जगह में रहते हुए भिक्षा मांग कर अपना जीवन निर्वाह करना | वैरागी जीवन का यह रूप समाज द्वारा भी पूर्णरूप से स्वीकार होगा एक मृगमरीचका के समान ही है |  भारतीय दर्शन में वैराग्य के विषय में मुख्य तौर पर दो सिद्धांत सामने आतें है, एक यह कि  संसार एक ऐसा मायाजाल है जहाँ पर हम इसके नश्वर रूप को अखंड सत्य मानते हुए इसे अपने जीवन मूल्यों में उतार कर  जीवन जीते हैं  तथा दूसरा यह कि हमारा जीवन नश्वर है |   उपरोक्त उल्लखित शाश्वत सिद्धांतो में निहित सन्देश मुख्यतौर पर यही है कि हम संसार के परिवर्तनशील तथा अस्थिर गुणों के साथ मानव जीवन की नश्वरता को समझते हुए अपने जीवन में ऐसा आ...