वर्तमान समय में श्रीमद्भगवत्गीता के कर्मयोग सिद्धांत की उपयोगिता (The utility of the Karmayoga principle of Srimad Bhagavat Gita in the present day)
श्रीमद्भगवतगीता में श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को अपने कर्तव्यपथ पर अग्रसर करने हेतु जिस कर्मयोग सिद्धांत का उपदेश दिया गया, उसको हम समझें तो यह स्वतः सिद्ध हो जाता है कि श्री कृष्ण का ध्येय केवल अर्जुन को अपने कर्तव्य का बोध कराना ही नहीं था बल्कि मनुष्य मात्र को ज्ञान की ऐसी रोशनी प्रदान करना था, जहाँ पर मनुष्य अपने आत्म तत्व से साक्षात्कार करते हुए परम शांति तथा सम्पूर्णता के भाव से भरकर अपने मूल स्वभावानुकूल अपने जीवन में कर्म को ऐसे भाव में लिप्त हो करे कि उस पर कर्म बंधन का प्रभाव उसके तथा समाज के लिए कल्याणकारी सिद्ध हो | हम जिस भौतिक परिवेश में अपना जीवन निर्वाह कर रहे हैं, उसके प्रभाव में हम हर क्षण किसी न किसी कार्य को कर रहे होते हैं, अगर हम आराम से बैठे हैं तब भी हम कुछ न कुछ सोच रहे होते हैं या देख रहे होते हैं और कुछ भी नहीं तो हम अपने कर्म के रूप में श्वांस तो ले ही रहे होते हैं | यह कहना गलत नहीं होगा कि मनुष्य में जब तक प्राण वायु है या यूँ कहे मनुष्य जब तक जीवित है एक क्षण के लिए भी बिना कर्म किये ...